
सम्यग्दण्डो वपुष: सम्यग्दण्डस्तथा च वचनस्य ।
मनस: सम्यग्दण्डो गुप्तीनां त्रितयमवगम्यम् ॥202॥
सम्यक् विधि से करे तन वश, वचन सम्यक् रोध हों ।
सम्यक् विधि से मन सुथिर, त्रय दण्ड रुक त्रय गुप्ति हों ॥२०२॥
अन्वयार्थ : [वपुष:] शरीर को [सम्यग्दण्ड:] सम्यक्तया वश करना, [तथा] तथा [वचनस्य] वचन को [सम्यग्दण्ड:] सम्यक् प्रकार वश करना [च] और [मनस:] मन का [सम्यग्दण्ड:] सम्यक्-रूप से निरोध करना - इस प्रकार [गुप्तीनां त्रितयम्] तीन गुप्तियों को [अवगम्यम्] जानना चाहिए ।
Meaning : One should carefully observe the three controls, proper control of body, proper control of speech, and proper control of mind.
टोडरमल