
इदमावश्यकषट्कं समतास्तववन्दनाप्रतिक्रमणम् ।
प्रत्याख्यानं वपुषो व्युत्सर्गश्चेति कर्त्तव्यम् ॥201॥
ये नित षडावश्यक करो, समता रु स्तव वन्दना ।
प्रतिक्रमण प्रत्याख्यान, कायोत्सर्ग जिससे बन्ध ना ॥२०१॥
अन्वयार्थ : [समतास्तववन्दनाप्रतिक्रमणम्] समता, स्तवन, वन्दना, प्रतिक्रमण [प्रत्याख्यानं] प्रत्याख्यान [च] और [वपुषो व्युत्सर्ग:] कायोत्सर्ग-[इति] इस प्रकार [इदम्] यह [आवश्यक षट्कं] छह आवश्यक [कर्त्तव्यम्] करना चाहिए ।
Meaning : Equanimity, praising, bowing, repentance and renunciation, and giving up attachment for the body are the six duties, which should be observed.
टोडरमल