+ दश धर्म -
धर्म: सेव्य: क्षान्तिर्मृदुत्वमृजुता च शौचमथ सत्यम् ।
अकिञ्चन्यं ब्रह्म त्यागश्च तपश्च संयमश्चेति ॥204॥
उत्तम क्षमा मृदुता सरलता, शाैच सत्य सुसंयम ।
तप त्याग आकिंचन्य अरु, ब्रम्हचर्य सेव्य सतत धरम ॥२०४॥
अन्वयार्थ : [क्षान्ति:] क्षमा, [मृदुत्वं] मार्दव, [ऋजुता] सरलता अर्थात् आर्जव [शौचम्] शौच [अथ] पश्चात् [सत्यम्] सत्य, [च] तथा [अकिंञ्चन्यं] आकिञ्चन, [ब्रह्म] ब्रह्मचर्य, [च] और [त्याग:] त्याग, [च] और [तप:] तप [च] और [संयम:] संयम [इति] इस प्रकार [धर्म:] दश प्रकार का धर्म [सेव्य:] सेवन करना योग्य है ।
Meaning : Forgiveness, humility, straight forwardness truth, contentment, Restraint, austerities, charity, nonattachment, and chastity are the (10) observances to be followed.

  टोडरमल