
बद्धोद्यमेन नित्यं लब्ध्वा समयं च बोधिलाभस्य ।
पदमवलम्ब्य मुनीनां कर्त्तव्यं सपदि परिपूर्णम् ॥210॥
यह विकल भी सत् यत्न से नित बोधि पाने के समय ।
पा मुनि पद अवलम्ब कर, परिपूर्ण शीघ्र करो स्वयं ॥२१०॥
अन्वयार्थ : [च] और यह विकलरत्नत्रय [नित्यं] निरन्तर [बद्धोद्यमेन] उद्यम करने में तत्पर ऐसे मोक्षाभिलाषी गृहस्थों को [बोधिलाभस्य] रत्नत्रय के लाभ का [समयं] समय [लब्ध्या] प्राप्त करके तथा [मुनीनां] मुनियों के [पदम्] पद का-[चरण का] [अवलम्ब्य] अवलम्बन करके [सपदि] शीघ्र ही [परिपूर्णम्] परिपूर्ण [कर्त्तव्यम्] करना योग्य है ।
Meaning : With a determined continuous effort, one should, when the opportunity for full attainment of Ratna-Traya is available, adopt the order of saints, and make it complete, without delay.
टोडरमल