
योगात्प्रदेशबन्ध: स्थितिबन्धो भवति तु कषायात् ।
दर्शनबोधचरित्रं न योगरूपं कषायरूपं च ॥215॥
प्रदेश बन्ध है योग से, स्थिति बन्ध कषाय से ।
नहिं योगरूप कषायमय नहिं, दर्श बोध चरित्र ये ॥२१५॥
अन्वयार्थ : [प्रदेशबन्ध:] प्रदेशबन्ध [योगात्] मन, वचन, काय के व्यापार से [तु] और [स्थितिबन्ध:] स्थितिबन्ध [कषायात्] क्रोधादि कषायों से [भवति] होता है, परन्तु [दर्शनबोधचरित्रं] सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्ररूप रत्नत्रय [न योगरूपं च कषायरूपं] योगरूप और कषायरूप नहीं हैं ।
Meaning : Pradesha Bandha, bondage of Karmic molecules is due to soul's vibratory activity, and Sthiti Bandha, duration bondage, is due to passions. But Right Belief, Knowledge and Conduct have neither the nature of vibrations nor of passions.
टोडरमल