वर्णै: कृतानि चित्रै: पदानि तु पदै: कृतानि वाक्यानि ।
वाक्यै: कृतं पवित्रं शास्त्रमिदं न पुनरस्माभि: ॥226॥
इन विविध वर्णों से बने, पद वाक्य बनते पदों से ।
शुभ शास्त्र वाक्यों से बना, नहिं किया है हमने इसे ॥२२६॥
अन्वयार्थ : [चित्रै:] अनेक प्रकार के [वर्णै:] अक्षरों से [कृतानि] रचे गये [पदानि] पद, [पदै:] पदों से [कृतानि] बनाये गये [वाक्यानि] वाक्य हैं, [तु] और [वाक्यै:] उन वाक्यों से [पुन:] फिर [इदं] यह [पवित्रं] पवित्रं-पूज्य [शास्त्रं] शास्त्र [कृतं] बनाया गया है, [अस्माभि:] हमारे द्वारा [न 'किमपि कृतम्'] कुछ भी नहीं किया गया है ।
Meaning : Words have been made by various alphabets, phrases have been made by words. This sacred treatise has been made by phrases ; and not by us.
टोडरमल