वर्णीजी
महातिशयसम्पूर्णम् कल्याणोद्दाममन्दिरम् ।
धर्मो ददाति निर्विघ्नं श्रीमत् सर्वज्ञवैभवम् ॥14॥
अन्वयार्थ :
धर्म, महाअतिशय से पूर्ण, कल्याणों के उत्कट निवासस्थान और निर्विघ्न ऐसे लक्ष्मी सहित सर्वज्ञ भगवान के वैभव
(तीर्थंकर पदवी)
को प्राप्त कराता है ॥१४॥
वर्णीजी