पं-सदासुखदासजी
पडिरूवकायसंफासणदा पडिरूवकालकिरिया य ।
पेसणकरणं संथारकरणमुवकरणपडिलिहणं॥126॥
काया को अनुकूल स्पर्श वयानुकूल6 हो वैयावृत्त ।
आज्ञा पालन, तृण संचारण उपकरणों का प्रतिलेखन॥126॥
सदासुखदासजी