सक्का वंसी छेत्तुं तत्तो उक्कढ्ढिओ पुणो दुक्खं ।
इय संजमस्स वि मणो विसएसुक्कढ्ढिदुं दुक्खं॥440॥
बाँस तोड़ना सरल किन्तु तरु से निकालना बहुत कठिन ।
विषय वृक्ष से संयत का मन दूर हटाना बहुत कठिन॥440॥
अन्वयार्थ : जैसे बाँस की शल्य लग जाना सुलभ है, परंतु अंग में चुभी हुई फाँस को निकालना बहुत कठिन होता है । तैसे ही संयमी को विषयों का त्याग करना तो सुलभ है, परंतु विषयों में उलझे मन को विषयों से छुडाना बहुत कष्ट से होता है/कठिन होता है ।

  सदासुखदासजी