तदियं असंतवयणं संतं जं कुणदि अण्णजादीगं ।
अविचारित्ता गोणं अस्सोत्ति जहेवमादीयं॥834॥
विद्यमान को अन्यरूप में कहना तीजा असत् वचन ।
बिना विचारे कहें बैल को घोड़ा यह - इत्यादि कथन॥834॥
अन्वयार्थ : विद्यमान वस्तु को अन्य जातिरूप कहना, यह तीसरा असत्यवचन है । जैसे - बिना विचारे गाय या बलद को अश्व/घोडा कहना - इत्यादि जानना ।

  सदासुखदासजी