
माणुण्णयस्स पुरिसद्दुमस्स णीचो वि आरुहदि सीसं ।
महिलाणिस्सेणीए णिस्सेणीएव्व दीहदुमं॥945॥
यथा नसैनी से छोटा नर ऊँचे तरु पर चढ़ जाता ।
त्यों नारी वश गर्वाेन्नत के सिर पर नीच पुरुष चढ़ता॥945॥
अन्वयार्थ : जैसे निसरणी से ऊँचे वृक्ष के ऊपर चढ जाते हैं, तैसे ही स्त्रीरूपी निसरणी द्वारा, मान से ऊँचा जो पुरुष रूप वृक्ष, उसके मस्तक पर नीच पुरुष चढ जाता है ।
सदासुखदासजी