
देहस्स सुक्कसोणिय असुई परिणामिकारणं जह्मा ।
देहो वि होइ असुई अमेज्झघदपूरओ व तदो॥1010॥
अशुचिवीर्य-रज हैं तन के परिणामी कारण इसीलिए ।
यह तन भी है अशुचि यथा, मल निर्मित घेवर मलिन रहे॥1010॥
अन्वयार्थ : इस देह की उत्पत्ति का कारण माता का महा अशुचि रुधिर और पिता का वीर्य है । जैसे मलिन वस्तु से बनाया गया घेवर भी मलिन ही होता है, तैसे ही अशुचि बीज से अशुचि देह की ही उत्पत्ति होती है ।
सदासुखदासजी