पं-सदासुखदासजी
मासम्मि सत्तमे तस्स होदि चम्मणहरोमणिप्पत्ति ।
फंदणमट्ठममासे णवमे दसमे य णिग्गमणं॥1016॥
सप्तम में गर्भस्थ पिण्ड पर चर्म रोग नख बनते हैं ।
हलन-चलन हो अष्टम में, नवमंे दशवें में जन्म लहे॥1016॥
सदासुखदासजी