+ अब जहाँ यह देह उपजी, उस देह के क्षेत्र को तीन गाथाओं में कहते हैं - -
आमासयम्मि पक्कासयस्स उवरिं अमेज्झमज्झम्मि ।
वत्थिपडलपच्छण्णो अच्छइ गब्भे हु णवमासं॥1018॥
आमाशय के नीचे, पक्वाशय के ऊपर गर्भाशय ।
मांस रुधिर के जाल लिपटकर उसमें जीव रहे नव मास॥1018॥
अन्वयार्थ : भक्षण किया जो भोजन, वह उदर की अग्नि से अपक्व होता है, उसे आम कहते हैं, उसके रहने का स्थान उसे आमाशय कहते हैं । जो भोजन उदर की अग्नि से पक गया, उसे पक्क कहते हैं । वह पका आहार/मल उसके रहने के स्थान को पक्काशय कहते हैं । उस आम के रहने के स्थान में और पक्क/मल, उसके स्थान के ऊपर पक्क-अपक्क/विष्टा उसके बीच में वस्तिपटल/मांस-रुधिर से व्याप्त जो जाल जैसा आकार, उसमें नव महिने पर्यंत गर्भ में रहता है ।

  सदासुखदासजी