+ अब शरीर के अवयवों को तेरह गाथाओं द्वारा बतलाते हैं- -
अट्ठीणि हुंति तिण्णि हु सदाणि भरिदाणि कुणिममज्जाए ।
सव्वम्मि चेव देहे संधीणि हवंति तावदिया॥1033॥
अट्ठीेण हुंेत ेतण्णि हु सदोण भपरदोण कुेणममज्जाए ।
सव्वम्मि चवि दहिि संधीेण हवंेत तावेदया॥1033॥

  सदासुखदासजी