+ राधि इत्यादि महानिंद्य वस्तुएँ अपने मुख में डाली हैं । बाल्य-अवस्था में अज्ञानी बालक ने खाद्य- -
कुणिमकुडी कुडिमेहिं य भरिदा कुणिमं च सवदि सव्वत्तो ।
ताणं व अमेज्झमयं अमेज्झभरिदं सरीरमिणं॥1032॥
मलिन वस्तु से बनी कुटी यह मलिन वस्तु से भरी हुई ।
महामलिन मल बहता रहता मल से भरा पात्र शरीर॥1032॥
अन्वयार्थ : यह देह कुथित/मलिन वस्तु की कुटी है, मलिन वस्तु से ही भरी है तथा सर्व तरह सर्व द्वारों से सर्व शरीर के अंग-उपांगों से सडा दुर्गंध महामलिन मल उससे निरन्तर स्रवता है - झरता है तथा मल से भरे भाजन/पात्र-बर्तन के समान यह शरीर मल से भरा है औेर मल-मय ही है ।

  सदासुखदासजी