मादं सुदं च भगिणीमेगंते अल्लियंतगस्स मणो ।
खुब्भइ णारस्स सहसा किं पुण सेसासु महिलासु॥1102॥
माता पुत्री बहन अकेले में हों तो भी मन सहसा ।
चंचल हो जाता तो अन्य नारियों के संग कहना क्या?॥1102॥
अन्वयार्थ : एकांत में माता, पुत्री, बहन इनको भी देखता है तो पुरुष का मन शीघ्र ही क्षोभ को प्राप्त हो जाता है तो फिर अन्य स्त्रियों में चलायमान हो जाये, इसमें क्या आश्चर्य है?

  सदासुखदासजी