
गंथो भयं णराणं सहोदरा एयरत्थजा जं ते ।
अण्णोण्णं मारेदुं अत्थणिमित्तं मदिमकासी॥1135॥
एक नगर में जन्मे भाई सहोदर भी धन प्राप्ति निमित्त ।
करें परस्पर हत्या की मति अतः परिग्रह ही भय है॥1135॥
अन्वयार्थ : मनुष्यों को परिग्रह है, वह भय है, भय का कारण है; क्योंकि एकलछ नगर में एक पेट से उपजे भाई धन के लिये परस्पर में मारने की बुद्धि/इच्छा करते हैं, इसलिए जिसके पास परिग्रह है, उसे निश्चित ही भय है - ऐसा जानना ।
सदासुखदासजी