+ अब अन्य प्रकार से निद्रा जीतने के कारणों को कहते हैं - -
पीदी भए य सोगे य तहा णिद्दा ण होइ मणुयाणं ।
एदाण तुमं तिण्णिवि जागरणत्थं णिसेवेहिं॥1450॥
प्रीति शोक अथवा भय हो तो नींद नहीं आती नर को ।
इसीलिए निद्रा-जयार्थ तुम प्रीत्यादिक सेवन कर लो॥1450॥

  सदासुखदासजी