
साम्यमेकं परं कार्यं, साम्यं तत्त्वं परं स्मृतम् ।
साम्यं सर्वोपदेशाना,-मुपदेशो विमुक्तये ॥66॥
साम्य ही कर्तव्य उत्तम, साम्य उत्तम तत्त्व है ।
मुक्ति पाने के लिए, उपदेश ही यह श्रेष्ठ है॥
अन्वयार्थ : साम्य ही एक उत्कृष्ट कार्य है, साम्य ही एक उत्तम तत्त्व है तथा साम्य ही मुक्ति के लिए समस्त उत्तम उपदेशों में से एक उपदेश है ।