+ समस्त शास्त्रों का सार : साम्य -
साम्यं निःशेषशास्त्राणां, सारमाहुर्विपश्चित: ।
साम्यं कर्महाकक्ष,-दाहे दावानलायते ॥68॥
साम्य ही सब शास्त्र का है, सार यह गणधर कही ।
कर्म-वन को भस्म करने, हेतु दावानल यही॥
अन्वयार्थ : समस्त शास्त्रों का सारभूत यह साम्य ही है और यही साम्य, समस्त कर्मरूपी वन को जलाने में दावानल के समान है - ऐसा गणधरादि देव कहते हैं ।