
इत्युपासकसंस्कारः, कृतः श्रीपद्मनन्दिना ।
येषामेतदनुष्ठानं, तेषां धर्मोऽतिनिर्मल: ॥62॥
पद्मनन्दि ने रचा यह, 'उपासक संस्कार' है ।
इसमें कथित जो आचरें, वे धर्म अति निर्मल लहें॥
अन्वयार्थ : श्री पद्मनन्दि आचार्य ने 'उपासक संस्कार' अधिकार की रचना की है । जिन पुरुषों की प्रवृत्ति इस श्रावकाचार के अनुसार है, उन्हीं को निर्मल धर्म की प्राप्ति होती है ।