
तसरासिपुढविआदी, चउक्कपत्तेयहीणसंसारी।
साहारणजीवाणं, परिमाणं होदि जिणदिट्ठं॥206॥
अन्वयार्थ : सम्पूर्ण संसारी जीवराशि में से त्रस राशि का प्रमाण और पृथिव्यादि चतुष्क तथा प्रत्येक वनस्पतिकाय का प्रमाण जो कि ऊपर बताया गया है घटाने पर जो शेष रहे उतना ही साधारण जीवों का प्रमाण है, ऐसा जिनेन्द्रदेव ने कहा है ॥206॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका