जीवतत्त्वप्रदीपिका
परमाणूहिं अणंतेहिं, वग्गणसण्णा हु होदि एक्का हु।
ताहि अणंताहिं णियमा, समयपबद्धो हवे एक्को॥245॥
अन्वयार्थ :
अनंत
(अनंतानन्त)
परमाणुओं की एक वर्गणा होती है और अनंत वर्गणाओं का नियम से एक समयप्रबद्ध होता है ॥245॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका