
उक्कस्सट्ठिदिचरिमे, सगसगउक्कस्ससंचओ होदि।
पणदेहाणं वरजोगादिससामग्गिसहियाणं॥250॥
अन्वयार्थ : उत्कृष्ट योग को आदि लेकर जो जो सामग्री तत्-तत् कर्म या नोकर्म के उत्कृष्ट संचय में कारण है उस-उस सामग्री के मिलने पर औदारिकादि पाँचों ही शरीरवालों के उत्कृष्ट स्थिति के अन्तसमय में अपने-अपने कर्म और नोकर्म का उत्कृष्ट संचय होता है ॥250॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका