पुरुगुणभोगे सेदे, करेदि लोयम्मि पुरुगुणं कम्मं।
पुरुउत्तमो य जम्हा, तम्हा सो वण्णिओ पुरिसो॥273॥
अन्वयार्थ : उत्कृष्ट गुण अथवा उत्कृष्ट भोगों का जो स्वामी हो, अथवा जो लोक में उत्कृष्ट गुणयुक्त कर्म को करे, अथवा जो स्वयं उत्तम हो उसको पुरुष कहते हैं ॥273॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका