किण्हं सिलासमाणे, किण्हादी छक्कमेण भूमिम्हि।
छक्कादी सुक्को त्ति य, धूलिम्मि जलम्मि सुक्केक्का॥292॥
अन्वयार्थ : शिलासमान क्रोध में केवल कृष्ण लेश्या की अपेक्षा से एक ही स्थान होता है। पृथ्वीसमान क्रोध में कृष्ण आदिक लेश्या की अपेक्षा छह स्थान हैं। धूलिसमान क्रोध में छह लेश्याओं से लेकर शुक्ललेश्या पर्यंत छह स्थान होते हैं और जलसमान क्रोध में केवल एक शुक्ललेश्या ही होती है॥292॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका