विवरीयमोहिणाणं, खओवसमियं च कम्मबीजं च।
वेभंगो त्ति पउच्चइ, समत्तणाणीण समयम्हि॥305॥
अन्वयार्थ : सर्वज्ञों के उपदिष्ट आगम में विपरीत अवधिज्ञान को विभंग कहते हैं। इसके दो भेद हैं-एक क्षायोपशमिक दूसरा भवप्रत्यय ॥305॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका