जीवतत्त्वप्रदीपिका
आभीयमासुरक्खं, भारहरामायणादिउवएसा।
तुच्छा असाहणीया, सुयअण्णाणं ति णं बेंति॥304॥
अन्वयार्थ :
चौरशास्त्र, तथा हिंसाशास्त्र, भारत रामायण आदि के परमार्थशून्य अतएव अनादरणीय उपदेशों को मिथ्या श्रुतज्ञान कहते हैं ॥304॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका