जीवतत्त्वप्रदीपिका
तेत्तीस वेंजणाइंर्, सत्तावीसा सरा तहा भणिया।
चत्तारि य जोगवहा, चउसट्ठी मूलवण्णाओ॥352॥
अन्वयार्थ :
तेतीस व्यंजन, सत्ताईस स्वर, चार योगवाह इस तरह कुल चौंसठ मूलवर्ण होते हैं ॥352॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका