
पडिवादी देसोही, अप्पडिवादी हवंति सेसा ओ।
मिच्छत्तं अविरमणं, ण य पडिवज्जंति चरमदुगे॥375॥
अन्वयार्थ : देशावधिज्ञान प्रतिपाती होता है और परमावधि तथा सर्वावधि अप्रतिपाती होते हैं। परमावधि और सर्वावधिवाले जीव नियम से मिथ्यात्व और अव्रत अवस्था को प्राप्त नहीं होते॥375॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका