
अवरोहिखेत्तदीहं, वित्थारुस्सेहयं ण जाणामो।
अण्णं पुण समकरणे, अवरोगाहणपमाणं तु॥379॥
अन्वयार्थ : जघन्य अवधिज्ञान के क्षेत्र की ऊँचाई लम्बाई चौड़ाई का भिन्न-भिन्न प्रमाण हम नहीं जानते। तथापि इतना जानते हैं कि समीकरण करने से जो क्षेत्रफल होता है, वह जघन्य अवगाहना के समान घनांगुल के असंख्यातवें भागमात्र होता है ॥379॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका