अवरोगाहणमाणं, उस्सेहंगुलअसंखभागस्स।
सूइस्स य घणपदरं, होदि हु तक्खेत्तसमकरणे॥380॥
अन्वयार्थ : क्षेत्रखंड विधान से समीकरण करने पर प्राप्त उत्सेधांगुल (व्यवहार सूच्यंगुल) के असंख्यातवें भाग प्रमाण-भुजा कोटी और वेध में परस्पर गुणा करने से घनांगुल के असंख्यातवें भाग प्रमाण जितना जघन्य अवगाहना का प्रमाण होता है उतना ही जघन्य अवधिज्ञान का क्षेत्र होता है ॥380॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका