धुवहारकम्मवग्गणगुणगारं कम्मवग्गणं गुणिदे।
समयपबद्धपमाणं, जाणिज्जो ओहिविसयम्हि॥385॥
अन्वयार्थ : ध्रुवहाररूप कार्मणवर्गणा के गुणाकार का और कार्मणवर्गणा का परस्पर गुणा करने से अवधिज्ञान के विषय में समयप्रबद्ध का प्रमाण निकलता है। जघन्य देशावधि का विषयभूत जो द्रव्य कहा था, उसी का नाम यहाँ समयप्रबद्ध जानना ॥385॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका