अवरद्दव्वादुवरिमदव्ववियप्पाय होदि धुवहारो।
सिद्धाणंतिमभागो, अभव्वसिद्धादणंतगुणो॥384॥
अन्वयार्थ : जघन्य देशावधि ज्ञान के विषयभूत द्रव्य से ऊपर द्वितीय आदि अवधिज्ञान के भेदों के विषयभूत द्रव्यों को लाने के लिये सिद्ध राशि का अनंतवाँ भाग और अभव्य राशि से अनंत गुणा ध्रुवभागहार होता है ॥384॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका