
तत्तो कम्मइयस्सिगिसमयपबद्धं विविस्ससोवचयं।
धुवहारस्स विभज्जं, सव्वोही जाव ताव हवे॥397॥
अन्वयार्थ : इसके अनन्तर मनोवर्गणा में ध्रुवहार का भाग देना चाहिये। इसतरह भाग देते- देते विस्रसोपचयरहित कार्मण का एक समयप्रबद्ध प्रमाण विषय आता है। उक्त क्रमानुसार इसमें भी सर्वावधि के विषय पर्यन्त ध्रुवहार का भाग देते जाना चाहिये ॥397॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका