
सव्वोहि त्ति य कमसो, आवलिअसंखभागगुणिदकमा।
दव्वाणं भावाणं, पदसंखा सरिसगा होंति॥423॥
अन्वयार्थ : जघन्य देशावधि से सर्वावधि पर्यन्त द्रव्य की पर्यायरूप भाव के भेद पूर्व-पूर्व भेद की अपेक्षा आवली के असंख्यातवें भाग से गुणितक्रम हैं। अतएव द्रव्य तथा भाव के पदों की संख्या सदृश है ॥423॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका