जीवतत्त्वप्रदीपिका
एइंदियपहुदीणं, खीणकसायंतणंतरासीणं।
जोगो अचक्खुदंसणजीवाणं होदि परिमाणं॥488॥
अन्वयार्थ :
एकेन्द्रिय जीवों से लेकर क्षीणकषायपर्यन्त अनंतराशि के जोड़ को अचक्षुदर्शन वाले जीवों का प्रमाण समझना चाहिये ॥488॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका