किण्हा णीला काऊ, तेऊ पम्मा य सुक्कलेस्सा य।
लेस्साणं णिद्देसा, छच्चेव हवंति णियमेण॥493॥
अन्वयार्थ : लेश्याओं के नियम से ये छह ही निर्देश - संज्ञाएँ हैं :- कृष्णलेश्या, नीललेश्या, कापोतलेश्या, तेजोलेश्या (पीतलेश्या), पद्मलेश्या, शुक्ललेश्या ॥493॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका