
खेत्तादो असुहतिया, अणंतलोगा कमेण परिहीणा।
कालादोतीदादो, अणंतगुणिदा कमा हीणा॥538॥
अन्वयार्थ : क्षेत्रप्रमाण की अपेक्षा तीन अशुभ लेश्यावाले जीव लोकाकाश के प्रदेशों से अनंतगुणे हैं, परन्तु उत्तरोत्तर क्रम से हीन-हीन हैं। तथा काल की अपेक्षा अशुभ लेश्यावालों का प्रमाण, भूतकाल के जितने समय हैं उससे अनंतगुणा है। यह प्रमाण भी उत्तरोत्तर हीनक्रम समझना चाहिये ॥538॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका