णवरि समुग्घादम्मि य, संखातीदा हवंति भागा वा।
सव्वो वा खलु लोगो फासो होदित्ति णिद्दिट्ठो॥550॥
अन्वयार्थ : केवली समुद्घात में विशेषता यह है कि दण्ड समुद्घात में स्पर्श क्षेत्र की तरह संख्यात प्रतरांगुल से गुणित जगच्छ्रेणी प्रमाण है। स्थित वा उपविष्ट कपाट समुद्घात में संख्यात सूच्यंगुल मात्र जगतप्रतर प्रमाण है। प्रतर समुद्घात में लोक के असंख्यात भागों में से एक भाग को छोड़कर शेष बहुभागप्रमाण स्पर्श है तथा लोकपूरण समुद्घात में सर्वलोकप्रमाण स्पर्श है ॥550॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका