छप्पंचणवविहाणं, अत्थाणं जिणवरोवइट्ठाणं।
आणाए अहिगमेण य, सद्दहणं होइ सम्मत्तं॥561॥
अन्वयार्थ : जिनेन्द्र देव द्वारा कहे छह द्रव्य, पाँच अस्तिकाय, नव पदार्थ - इनका श्रद्धान-रुचि- यथावत् प्रतीति करना, उसको सम्यक्‍त्व कहते हैं। यह दो प्रकार से होता है - आज्ञा से एवं अधिगम से ॥561॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका