अट्ठत्तीसद्धलवा, णाली वेणालिया मुहुत्त्यतु।
एगसमयेण हीणं, भिण्णमुहुत्तं तदो सेसं॥575॥
अन्वयार्थ : साढ़े अड़तीस लव की एक नाली (घड़ी) होती है। दो घड़ी का एक मुहूर्त होता है। इसमें एक समय कम करने से भिन्नमुहूर्त अथवा उत्कृष्ट अन्तर्मुहूर्त होता है। तथा इसके आगे दो, तीन, चार आदि समय कम करने से अन्तर्मुहूर्त के भेद होते हैं ॥575॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका