
दिवसो पक्खो मासो, उडु अयणं वस्समेवमादी हु।
संखेज्जासंखेज्जाणंताओ होदि ववहारो॥576॥
अन्वयार्थ : तीन मुहूर्त का एक दिवस, पन्द्रह अहोरात्र का एक पक्ष, दो पक्ष का एक मास, दो मास की एक ऋतु, तीन ऋतु का एक अयन, दो अयन का एक वर्ष इत्यादि व्यवहार काल के आवली से लेकर संख्यात असंख्यात अनंत भेद होते हैं ॥576॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका