
लोगागासपदेसा, धम्माधम्मेगजीवगपदेसा।
सरिसा हु पदेसो पुण, परमाणुअवट्ठिदं खेत्तं॥591॥
अन्वयार्थ : लोकाकाश, धर्मद्रव्य, अधर्मद्रव्य और एक जीवद्रव्य के प्रदेश सभी संख्या में समान हैं क्योंकि ये सर्व जगत्श्रेणी के घनप्रमाण हैं। पुद्गल परमाणु जितना क्षेत्र रोकता है, वह प्रदेश का प्रमाण है। इसलिये जघन्य क्षेत्र और जघन्य द्रव्य अविभागी है ॥591॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका