जीवतत्त्वप्रदीपिका
अणुसंखासंखेज्जाणंता य अगेज्जगेहि अंतरिया।
आहारतेजभासामणकम्मइया धुवक्खंधा॥594॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका