हेट्ठिमउक्‍कस्सं पुण रूवहियं उवरिमं जहण्णं खु।
इदि तेवीसवियप्पा, पुग्गलदव्वा हु जिणदिट्ठा॥601॥
अन्वयार्थ : तेईस वर्गणाओं में से अणुवर्गणा को छोड़कर शेष वर्गणाओं के नीचे का जो उत्कृष्ट भेद है उसमें एक अधिक होने पर उसके ऊपर की वर्गणा का जघन्य भेद होता है। ऐसे तेईस वर्गणाभेद से युक्त पुद्‍गल द्रव्य जिनदेव ने कहे हैं ॥601॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका