पुढवी जलं च छाया, चउरिंदियविसयकम्मपरमाणु।
छव्विहभेयं भणियं, पोग्गलदव्वं जिणवरेहिं॥602॥
अन्वयार्थ : पृथ्वी, जल, छाया, नेत्रों को छोड़कर अन्य चार इन्द्रियों का विषय, कार्मण स्कंध और परमाणु ऐसे छह प्रकार के पुद्‍गलद्रव्य जिनेश्वर देवों ने कहे हैं ॥602॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका