जीवतत्त्वप्रदीपिका
गदिठाणोग्गहकिरियासाधणभूदं खु होदि धम्मतियं।
वत्तणकिरियासाहणभूदो णियमेण कालो दु॥605॥
अन्वयार्थ :
गति, स्थिति, अवगाह इन क्रियाओं के साधन क्रम से धर्म, अधर्म, आकाश द्रव्य है। और वर्तना क्रिया का साधनभूत नियम से काल द्रव्य है ॥605॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका