
एगगुणं तु जहण्णं णिद्धत्तं विगुणतिगुणसंखेज्जाऽ-।
संखेज्जाणंतगुणं, होदि तहा रुक्खभावं च॥610॥
अन्वयार्थ : स्निग्धगुण जो एक गुण है, वह जघन्य है, जिसका एक अंश हो उसको एक गुण कहते हैं। उससे लेकर द्विगुण, त्रिगुण, संख्यातगुण, असंख्यातगुण, अनंतगुणरूप स्निग्धगुण जानना। वैसे ही रूक्षगुण भी जानना। केवलज्ञानगम्य सबसे थोड़ा तो स्निग्धत्व-रूक्षत्व उसको एक अंश मानकर उस अपेक्षा स्निग्ध रूक्ष गुणों के अंशों का यहाँं प्रमाण जानना ॥610॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका